Udai Shankar ka Hindi Sahitya

Just another weblog

38 Posts

50 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15132 postid : 601661

"बाल गीत"

  • SocialTwist Tell-a-Friend

जनम दिन जनम दिन ,

नाचो बच्चों ताक धिना धिन ।

वाह सजावट ! झालर ऐसे लटक रही है ,

जैसे बरसे पानी रुक-रुक रिम-झिम रिम-झिम ।

केक बर्थड़े पिंक कलर का ,

चमके उसपर चेरी टिम टिम ।

बड़ी हो गई बिटिया अब तो ,

पड़ी लगानी कैंडिल गिन-गिन ।

एक बार में फूँक मार कर ,

बुझा दिये सब कैंडिल झिल-मिल ।

‘गोलू’ ‘रीमा’ ‘अंकुर’ ‘टिनमिन’ ,

कहें , मुबारक उसे जनमदिन ।

ऐसा ही एक सपना देखा ,

बिटिया के डैडी ने एक दिन ।

उदय  शंकर  श्रीवास्तव

कटरा  बाजार , गोंडा  (उ.प्र.)

9716027886

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 15, 2013

जनम दिन जनम दिन , नाचो बच्चों ताक धिना धिन । वाह सजावट ! झालर ऐसे लटक रही है , जैसे बरसे पानी रुक-रुक रिम-झिम रिम-झिम । सुंदर पंक्तियाँ आभार !!!

    Udai Shankar Srivastava के द्वारा
    September 16, 2013

    प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद . आशा है मेरी अन्य रचनाओं पर भी अपना मार्गदर्शन देते रहेंगे .

ushataneja के द्वारा
September 15, 2013

वह क्या बात है. बच्चे खुश तो डैडी भी खुश.

    Udai Shankar Srivastava के द्वारा
    September 16, 2013

    बिटिया का जनमदिन है तो डैडी को तो खुश होना ही है . प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद . आशा है मेरी अन्य रचनाओं पर भी आपका मार्गदर्शन मिलता रहेगा .


topic of the week



latest from jagran